…………
उस कागज़ के ख़त को मैंने आज भी संभाल के रखा है
कागज़ का वोह ख़त अब तो पुराना हो गया है
किसी पुरानी पसंदीदा किताब के पन्नों की तरह, वोह ख़त भी तार तार होने लगा है
कागज़ की सफेदी जाती रही, अब वक़्त के साथ वोह पीला हो गया है
लब्ज़ भी कुछ धुंधले से हो चले हैं……
Heart touching Audio and words👌👌👌👌👌
LikeLiked by 1 person
Thank you so much for such heart warming comment. Shukriya!
LikeLiked by 2 people
Thank you so much for such a heart warming comment! Shukriya
LikeLike