आ भी जाओ कि ज़िन्दगी कम है ~ यामिनी दास
#shayari #hindikavita #romanticpoem #hindishayari
‘नीली स्याही के दाग़’
…………
उस कागज़ के ख़त को मैंने आज भी संभाल के रखा है
कागज़ का वोह ख़त अब तो पुराना हो गया है
किसी पुरानी पसंदीदा किताब के पन्नों की तरह, वोह ख़त भी तार तार होने लगा है
कागज़ की सफेदी जाती रही, अब वक़्त के साथ वोह पीला हो गया है
लब्ज़ भी कुछ धुंधले से हो चले हैं……
“पिघलती आयतें”

चाँदनी रात के तले
मेरे जिस्म के पन्नों पर
जब तुम्हारी उंगलियाँ
आयतें लिखती हैं
मेरे जिस्म पर छपी हर तिल
तुम्हारे लब्ज़ों की, बन जाती है चँद्रबिंदू
तुम्हारी भावनाओं की स्याही
टकराती है मेरे दिल की धड़कनो से
लब्ज़ बहते हैं फिर बेबाक
मेरे जिस्म के हर उतार हर चढ़ाव पर
लेकिन तुम्हारी नज़रों की हरारत
हर लब्ज़ को पिघला देती है
और फिर तुम्हारे लब
उन पिघलती हुई आयतों को पी जाते हैं
तुम्हारी गज़ल बन जाती हूँ मैं
कहती हूँ धीरे से तुम्हारे कानों में
बहुत करीब आ कर….
“फिर से लिखो न मुझ पर तुम….
एक कोरा कागज़ हूँ मैं, देखो न……तुम्हारा….”
~ विभावरी
पीली धूप

पीली पीली सुनहरी धूप सी
तेरे इश्क की कच्ची कली सी
देखो न मेरे पी मैं कैसी खिली
मैं कैसी खिली 🌻
“ज़िद्द”
उन्हें भी ज़िद्द ना पास आने की
हमें भी ज़िद्द दूर दूर जाने की
इस ‘अपनी’ ज़िद्द के आगे
तुम भी हारे
मैं भी हारी
वक़्त चला
कहके अलविदा
फिर वो ना आया
तुमने बुलाया
मैंने भी बुलाया
चांदनी रूठी है कबसे
वो ज़रा न मानी
तुमने मनाया
मैंने भी मनाया
तारे सिसकते हैं कबसे
वो ना मुस्कुराये फिर से
तुमने हँसाया
मैंने गुदगुदाया
फ़ोन अब भी बजता है
पर सुर में नही
तुमने ना उठाया
मैंने भी ना उठाया
खामोशियाँ कुछ तो कहती हैं
अनसुनी तुम भी करते हो
और मैं भी सुनती नही
आँखें भर तो आती हैं
पर अश्क़ तुम छलकाते नही
मैं भी बस मुस्कुरा देती हूँ
रातें बहुत लम्बी और ठण्डी हो चली हैं
पर तुम काँपते नही
मैं भी ठिठुरती नही
मौसम रंग बदलते हैं
पतझड़, सर्दियाँ, सावन और गर्मियाँ
पर तुम ना बदले
और मैं भी ना बदली
पर एक गाना तुम भी गुनगुनाते हो
और मैं भी
तुम सुबह,
मैं दोपहर को
तुम शाम,
मैं रात को
तेरे बिना ज़िन्दगी से कोई, शिक़वा, तो नही
शिक़वा नही, शिक़वा नही, शिक़वा नही
तेरे बिना ज़िन्दगी भी लेकिन, ज़िन्दगी, तो नही
ज़िन्दगी नही, ज़िन्दगी नही, ज़िन्दगी नही……
– विभावरी