स्पर्श April 11, 2019 ~ vibhadassingh कहां से तुम शुरू, कहां पे मैं ख़तम खो के तुम में, न रहा कोई ग़म कस कर मैंने तुम्हे यूं था पकड़ा जैसे जाते हुए लम्हे को मुठी में जोरो से था जकड़ा तुमने जिस तरह मेरे हाथ थे थामे लुटा दूं मेरी ज़िन्दगी की सैकड़ों सुबह और शामें…..❤ Share this: Share on X (Opens in new window) X Share on Facebook (Opens in new window) Facebook Like Loading...